>>Languages of the North East with special reference to Khasi - S.A.Lyngdoh>>प्राकृत साहित्य में वास्तुविद्या-निरूपण - वृषभ प्रसाद जैन>>हिंदी का आदि-वैयाकरण कौन? - विक्रम गुप्ता>>A major contribution to the linguistic typology of the South Asian linguistic area- Sanford B Steever>>देवनागरी से रोमन लिप्यंतरण : अंग्रेजी-हिंदी मशीनी अनुवाद के विशेष संबंध में - अम्ब्रीश त्रिपाठी>>उत्तर-आधुनिकता की पश्चिमी और हमारी अवधारणा में अंतर है- उदय नारायण सिंह>>The Morphology of Khasi Verbs and their Semantics-Saralin A. Lyngdoh>>कोश : इतिहास एवं वर्तमान - बृजेश कुमार यादव>>आदिवासियों का ज्ञान उनके जीवन जीने की कला है - प्रो. गणेश देवी>>मशीनीकरण से कंप्यूटरीकरण - कृष्ण कुमार गोस्वामी>>आज मैंने अपने मोबाईल से एक नंबर डीलीट कर दिया, हमेशा के लिए- अरिमर्दन>>भाषा अनुरक्षण एवं विस्थापन : एक मूल्यांकन - सुमेधा शुक्ला>>भारतीय भाषाएँ और भाषिक संसाधन - धनंजय विलास झालटे>>बुन्देली और हिन्दी का औच्चारणिक व्यतिरेकी अध्ययन - अंकिता आचार्य>>हिन्दी शब्दतंत्र की संरचना - प्रभाकर पाण्डेय, लक्ष्मी कश्यप, पुष्पक भट्टाचार्य>>कभी भी अंग्रेजी भारतीय भाषा नहीं बन सकती- के॰ वी॰ सुब्बाराव>>विज्ञान के भाषा के रूप में संस्कृत- मार्कण्डेय काटजू>>हमारी चुनौतियाँ यूरोप की तुलना में बहुत ज्यादा हैं- स्वर्णलता>>‘पाठ विश्लेषण’: गुपुत प्रगट जहँ जो जेहिं खानिक - ऋषभ देव शर्मा>>एक उगते सूरज का ढल जाना – अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी>>हिंदी-अंग्रेजी पुनरुक्ति शब्दों का आर्थी विश्लेषण - शिल्पा>>आनलाइन शॉपिंग सुविधा एवं सावधानियाँ - अंजनी राय>>व्याकरणिक संसक्ति की युक्तियाँ- मोहिनी मुरारका>>A Computational Morphological Analysis of Marathi Negative Markers- Swapnil D. Moon>>जन की भाषा में जन का रचनाकार: कृशन चंदर - मृत्युंजय प्रभाकर>>Case Marker in Bokar- Geyi Ete>>अनुवाद का सैध्दांतिक परिप्रेक्ष्य - सुमेध खु. हाडके>>कथक में स्त्री की आवाज़ और प्रतिरोधी स्वर- अवंतिका शुक्ला>>भाषा अभियांत्रिकी का उद्भव एवं विकास : प्रवेश कुमार द्विवेदी>>A Socio-Cultural Perspective on Second Language Acquisition - Soumi Mandal>>जाना भाषाविज्ञान के पितामह का - अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी>>भारत की शि‍क्षा नीति‍ और राजभाषा नीति - राहुल खटे>>भाषाविज्ञान एक परिचय - आम्रपाल शेंद्रे एवं अम्ब्रीश त्रिपाठी>>वैदर्भिय बोली का काल, पक्ष एवं वृत्ति - स्वप्निल डी. मून>>The Concept of Language : Noam Chomsky>>मशीनी अनुवाद : भूत, वर्तमान एवं भविष्य - करुणा निधि>>हिंदी बनाम अंग्रेजी शब्दकोश - विक्रम गुप्ता>>प्राकृतिक भाषा संसाधन ( NLP) में संदिग्‍धार्थकता की प्रकृति - प्रवेश कुमार द्विवेदी>>हिंदी भाषा शिक्षण और अधिगम संबंधी वेबसाइटों का मूल्यांकन - संजय कुमार

ISSN : 2231-4989

:: Languages are not actually means of representing a truth already known, but rather of discovering the previously unknown.-Humboldt ([1903–36]:L.IV:27) - ::

शोध


प्राकृतिक भाषा संसाधन ( NLP) में संदिग्‍धार्थकता की प्रकृति - प्रवेश कुमार द्विवेदी

प्राकृतिक भाषा संसाधन ( NLP) में संदिग्‍धार्थकता की प्रकृति - प्रवेश कुमार द्विवेदी

मानव समुदाय आपस में विचार विनिमय करने हेतु किसी न किसी प्राकृतिक भाषा का प्रयोग करता है। इसी प्राकृतिक भाषा के प्रयोग से मानव अपने दैनिक जीवन के सभी कार्य को पूर्ण करने में सफल हो पाता है। समस्‍त भाषाओं की अपनी एक वाक्‍य संरचना होती है, जिसके माध्‍यम से मानव अपनी अभिव्‍यक्ति को पूरा करता है। कभी-कभी भाषा की संरचना अथवा प्रकार्य का गठन ही कुछ ऐसा हो जाता है कि वह शब्‍द अथवा वाक्‍य एकाधिक अर्थ को प्रकट करने लगता है, जिससे मानव आपस में विनोद भी करने लगता है। भाषावैज्ञानिक

>> आगे पढ़ें
नमन
भाषा-शिक्षण
पुस्तक समीक्षा
साक्षात्कार
अंतरभाषिकी
शोध
आलेख
पुस्तक समीक्षा
अनुवाद-चिंतन
वैचारिकी
नमन
नमन
पुस्तक समीक्षा

URL http://www.beamerwin.de festplatten test 2014
News: >>प्रकाशकीय नीति>>संकटग्रस्त भाषाओं के सर्वेक्षण का काम शुरू>> हेलो शब्द कहाँ से आया? >>देश की भाषाओं के लिए नई ऊर्जा से काम करने की आवश्यकता है