ISSN : 2231-4989

वैचारिकी


क्या भाषा थोपने की चीज है ..? - परिमळा अंबेकर

क्या भाषा थोपने की चीज है ..? - परिमळा अंबेकर

बेंगलूरू मेट्रो से आरंभ हुआ हिंदी-कन्नड़ का भाषाई विवाद आजकल फिर से कर्नाटक की राजधानी और आस-पास के प्रदेशों में तूल पकड़ रहा है। मेट्रो स्टेशनों में हिंदी नेम-बोर्ड की आवश

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अंतरभाषिकी


भारतीय भाषाओं में राष्ट्रबोध की अवधारणा - वागीश राज शुक्ल

भारतीय भाषाओं में राष्ट्रबोध की अवधारणा - वागीश राज शुक्ल

भावाभिव्यक्तये प्रयुक्तानां सार्थकशब्दानां समष्टिरेव भाषा इति उच्यते अर्थात् भावाभिव्यक्ति के लिए प्रयुक्त सार्थक शब्दों की समष्टि ही भाषा कही जाती है ।

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News: >>प्रकाशकीय नीति>>संकटग्रस्त भाषाओं के सर्वेक्षण का काम शुरू>> हेलो शब्द कहाँ से आया? >>देश की भाषाओं के लिए नई ऊर्जा से काम करने की आवश्यकता है